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  1. 17 साल बाद flight में दुबारा सफ़र किया था .
    सब कुछ बदल गया था . अब planes के दरवाज़े तक पहुचने के लिए आपको बिना chair वाली बस में बैठने की जरूरत नहीं थी. checking बढ़ गए थे . pant के metal zip को भी security guardsdoubtful nazar से देख रहे थे .
    मेरी हालत वैसी थी जैसा कोई retired officer कुछ साल bad अपने ऑफिस
    दुबारा गया हो और उसे चीज़े बदली हुई नज़र आए. सब कुछ नया था. मेरा जन्म एक छोटे से andman island में हुआ था. सफ़र करने के लिए pani जहाज या हवाई जहाज. तब का सफ़र आज के सफ़र से अलग हुआ करता था.
    मेरे बगल के seat में अक्सर बकरियाँ बैठी रहती थी. या फिर कोई बड़ा साथी जैसे गाय , बैल . .
    तब के planes, planes न होकर एक तरह का लोकल बस था .. बस ज़मीन में न चल कर हवा में चलती थी. और उसके बाद जब भी board किया take off होते नहीं देख पाया ..हमेशा आंखे बंद ...और अपना सर अपने ही गोद में. ऐसा लगता है जैसे दिमाग में शरीर का सारा खून उतर गया हो ..सर प्लेन से bhi ज्यादा भारी महसूस होता है ..अपने नीचे से जमीन 
    को खिसकते हुए देखना बहुत खौफनाक लगता है. ऐसा अक्सर अपने office ke lift में भी महसूस होता है. इसलिए मुझे हमेशा medical seat लेना पड़ता है. जब भी aircraft हिलती है या कह लीजिये करवट लेना ..मै यही सोचता हूँ - "अब गया मै ..अब कुछ नहीं हो सकता " 3 - घंटे सर छुपाये रहता हूँ . और Air Hostess यही कहती है

    " First time in plane"?
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  2. 4 comments (tippni):

    1. honesty wid innocence.. :) liked it..

    2. nice post...thanks for sharing....

    3. nice post...thanks for sharing....